अस कहि बिहसि ताहि उर लाई
अस कहि बिहसि ताहि उर लाई
चौपाई ३, दोहा ३७ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
अस कहि बिहसि ताहि उर लाई। चलेउ सभाँ ममता अधिकाई॥ मंदोदरी हृदयँ कर चिंता। भयउ कंत पर बिधि बिपरीता॥ ३ ॥
अर्थ
रावण ने ऐसा कहकर हँसकर उसे हृदय से लगा लिया और ममता बढ़ाकर वह सभामें चला गया। मन्दोदरी हृदय में चिन्ता करने लगी कि पति पर विधाता प्रतिकूल हो गये।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।
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मंदोदरी-रावण संवाद