जासु दूत बल बरनि न जाई

चौपाई २, दोहा ३६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

जासु दूत बल बरनि न जाई। तेहि आएँ पुर कवन भलाई॥ दूतिन्ह सन सुनि पुरजन बानी। मंदोदरी अधिक अकुलानी॥ २ ॥

अर्थ

जिसके दूत का बल वर्णन नहीं किया जा सकता, उसके स्वयं नगर में आने पर कौन भलाई है (हमलोगों की बड़ी बुरी दशा होगी) ? दूतियों से नगरनिवासियों के वचन सुनकर मन्दोदरी बहुत ही व्याकुल हो गयी।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।

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मंदोदरी-रावण संवाद