उहाँ निसाचर रहहिं ससंका

चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

उहाँ निसाचर रहहिं ससंका। जब तें जारि गयउ कपि लंका॥ निज निज गृहँ सब करहिं बिचारा। नहिं निसिचर कुल केर उबारा॥ १ ॥

अर्थ

वहाँ (लङ्का में) जब से हनुमानजी लंका को जलाकर गये, तब से राक्षस भयभीत रहने लगे। अपने-अपने घरों में सब विचार करते हैं कि अब राक्षसकुल की रक्षा [का कोई उपाय] नहीं है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।

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मंदोदरी-रावण संवाद