रहसि जोरि कर पति पग लागी

चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

रहसि जोरि कर पति पग लागी। बोली बचन नीति रस पागी॥ कंत करष हरि सन परिहरहू। मोर कहा अति हित हियँ धरहू॥ ३ ॥

अर्थ

वह एकान्त में हाथ जोड़कर पति (रावण) के चरणों लगी और नीतिरस में पगी हुई वाणी बोली-हे प्रियतम! श्रीहरि से विरोध छोड़ दीजिये। मेरे कहने को अत्यन्त ही हितकर जानकर हृदय में धारण कीजिये।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “मंदोदरी-रावण संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता लौटाने और राम के सामर्थ्य की चेतावनी का वर्णन है।

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मंदोदरी-रावण संवाद