जलनिधि रघुपति दूत बिचारी

चौपाई ५, दोहा १ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी॥ ५ ॥

अर्थ

समुद्र ने उन्हें श्रीरघुनाथजी का दूत समझकर मैनाक पर्वत से कहा कि हे मैनाक ! तू इनकी थकावट दूर करनेवाला हो (अर्थात् अपने ऊपर इन्हें विश्राम दे)।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा और छाया-ग्राहिणी राक्षसी वध का वर्णन है।

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हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा