हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह

दोहा १ · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम॥ १ ॥

अर्थ

हनुमानजी ने उसे हाथ से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा-भाई! श्रीरामचन्द्रजी का काम किये बिना मुझे विश्राम कहाँ ?

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा” प्रकरण का दोहा १ है। इस प्रकरण में हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा और छाया-ग्राहिणी राक्षसी वध का वर्णन है।

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हनुमानजी का लंका प्रस्थान, सुरसा परीक्षा