अति बिसाल तरु एक उपारा
अति बिसाल तरु एक उपारा
चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
अति बिसाल तरु एक उपारा। बिरथ कीन्ह लंकेस कुमारा॥ रहे महाभट ताके संगा। गहि गहि कपि मर्दइ निज अंगा॥ ३ ॥
अर्थ
उन्होंने एक बहुत बड़ा वृक्ष उखाड़ लिया और [उसके प्रहार से] लंकेश्वर रावण के पुत्र मेघनाद को बिना रथ का कर दिया (रथ को तोड़कर उसे नीचे पटक दिया)। उसके साथ जो बड़े-बड़े योद्धा थे, उनको पकड़-पकड़कर हनुमानजी अपने शरीर से मसलने लगे।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।
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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना