ब्रह्मबान कपि कहुँ तेहिं मारा

चौपाई १, दोहा २० के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

ब्रह्मबान कपि कहुँ तेहिं मारा। परतिहुँ बार कटकु संघारा॥ तेहिं देखा कपि मुरुछित भयऊ। नागपास बाँधेसि लै गयऊ॥ १ ॥

अर्थ

उसने हनुमानजी को ब्रह्मबाण मारा, [जिसके लगते ही वे वृक्ष से नीचे गिर पड़े] परन्तु गिरते समय भी उन्होंने बहुत-सी सेना मार डाली। जब उसने देखा कि हनुमानजी मूर्छित हो गए हैं, तब वह उनको नागपाश से बाँधकर ले गया।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।

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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना