ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन
ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन
दोहा १९ · सुन्दरकाण्ड
दोहा पाठ
ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन कीन्ह बिचार। जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार॥ १९ ॥
अर्थ
अन्त में उसने ब्रह्मास्त्र का सन्धान (प्रयोग) किया, तब हनुमानजी ने मन में विचार किया कि यदि ब्रह्मास्त्र को नहीं मानूँ तो उसकी अपार महिमा मिट जाएगी।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना” प्रकरण का दोहा १९ है। इस प्रकरण में हनुमानजी द्वारा अशोकवाटिका विध्वंस, अक्षयकुमार वध और मेघनाद के नागपाश में बँधकर रावण-सभा में जाने का वर्णन है।
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अशोकवाटिका विध्वंस, नागपाश में बँधना