की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई

चौपाई ४, दोहा ६ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई। मोरें हृदय प्रीति अति होई॥ की तुम्ह रामु दीन अनुरागी। आयहु मोहि करन बड़भागी॥ ४ ॥

अर्थ

क्या आप हरि-भक्तों में से कोई हैं? क्योंकि मेरे हृदय में अत्यन्त प्रेम उमड़ रहा है। अथवा क्या आप दीनों से प्रेम करने वाले स्वयं श्रीरामजी ही हैं, जो मुझे बड़भागी बनाने (घर- बैठे दर्शन देकर कृतार्थ करने) आये हैं?

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमान-विभीषण संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लंका में हनुमानजी और विभीषण की भेंट तथा राम-भक्ति से पूर्ण संवाद का वर्णन है।

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हनुमान-विभीषण संवाद