बिहसि दसानन पूँछी बाता
बिहसि दसानन पूँछी बाता
चौपाई २, दोहा ५३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
बिहसि दसानन पूँछी बाता। कहसि न सुक आपनि कुसलाता॥ पुनि कहु खबरि बिभीषन केरी। जाहि मृत्यु आई अति नेरी॥ २ ॥
अर्थ
दशमुख रावण ने हँसकर बात पूछी--अरे शुक! अपनी कुशल क्यों नहीं कहता? फिर उस विभीषण का समाचार सुना, जिसकी मृत्यु अत्यन्त निकट आ गयी है।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।
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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र