करत राज लंका सठ त्यागी

चौपाई ३, दोहा ५३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

करत राज लंका सठ त्यागी। होइहि जव कर कीट अभागी॥ पुनि कहु भालु कीस कटकाई। कठिन काल प्रेरित चलि आई॥ ३ ॥

अर्थ

मूर्ख ने राज्य करते हुए लंका को त्याग दिया। अभागा अब जौ के कीड़े जैसा हो जाएगा। फिर भालू और वानरों की सेना का हाल कह, जो कठिन काल की प्रेरणा से यहाँ चली आयी है।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।

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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र