तुरत नाइ लछिमन पद माथा
तुरत नाइ लछिमन पद माथा
चौपाई १, दोहा ५३ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड
चौपाई पाठ
तुरत नाइ लछिमन पद माथा। चले दूत बरनत गुन गाथा॥ कहत राम जसु लंकाँ आए। रावन चरन सीस तिन्ह नाए॥ १ ॥
अर्थ
लक्ष्मणजी के चरणों में मस्तक नवाकर, श्रीरामजी के गुणों की कथा वर्णन करते हुए दूत तुरंत ही चल दिये। श्रीरामजी का यश कहते हुए वे लंका में आये और उन्होंने रावण के चरणों में सिर नवाये।
संदर्भ
यह सुन्दरकाण्ड के “शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में समुद्र पार करने के उपाय, शुक दूत का आगमन और लक्ष्मण के पत्र सहित वापसी का वर्णन है।
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शुक दूत का आना, लक्ष्मण का पत्र