रामु सत्यसंकल्प प्रभु सभा कालबस तोरि

दोहा ४१ · सुन्दरकाण्ड

दोहा पाठ

रामु सत्यसंकल्प प्रभु सभा कालबस तोरि। मैं रघुबीर सरन अब जाउँ देहु जनि खोरि॥ ४१ ॥

अर्थ

श्रीरामजी सत्यसंकल्प एवं [सर्वसमर्थ] प्रभु हैं और [हे रावण!] तुम्हारी सभा काल के वश है। अतः मैं अब श्रीरघुवीर की शरण जाता हूँ, मुझे दोष न देना।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “विभीषण की रावण को सलाह” प्रकरण का दोहा ४१ है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा रावण को नीति-उपदेश और रावण के अपमान के बाद विभीषण का लंका-त्याग निश्चय का वर्णन है।

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विभीषण की रावण को सलाह