अब बिलंबु केहि कारन कीजे

चौपाई ४, दोहा ३४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

अब बिलंबु केहि कारन कीजे। तुरत कपिन्ह कहुँ आयसु दीजे॥ कौतुक देखि सुमन बहु बरषी। नभ तें भवन चले सुर हरषी॥ ४ ॥

अर्थ

अब विलम्ब किस कारण किया जाय? वानरों को तुरंत आज्ञा दो। [ भगवान् की] यह लीला (रावणवध की तैयारी) देखकर, बहुत-से फूल बरसाकर और हर्षित होकर देवता आकाश से अपने-अपने लोक को चले।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।

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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश