सुनि प्रभु बचन कहहिं कपिबृंदा

चौपाई ३, दोहा ३४ के अंतर्गत · सुन्दरकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनि प्रभु बचन कहहिं कपिबृंदा। जय जय जय कृपाल सुखकंदा॥ तब रघुपति कपिपतिहि बोलावा। कहा चलैं कर करहु बनावा॥ ३ ॥

अर्थ

प्रभु के वचन सुनकर वानरगण कहने लगे--कृपालु आनन्दकन्द श्रीरामजी की जय हो, जय हो, जय हो! तब श्रीरघुनाथजी ने कपिराज सुग्रीव को बुलाया और कहा--चलने की तैयारी करो।

संदर्भ

यह सुन्दरकाण्ड के “हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में हनुमानजी का समुद्र पार लौटना, मधुवन प्रवेश, सुग्रीव मिलन और श्रीराम को सीता का संदेश व चूड़ामणि अर्पण का वर्णन है।

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हनुमानजी का लौटना और राम को संदेश