यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि
यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि
श्लोक ३ · लंकाकाण्ड
श्लोक पाठ
यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम्। खलानां दण्डकृद्योऽसौ शंकरः शं तनोतु मे॥ ३ ॥
अर्थ
जो सत्पुरुषों को अत्यन्त दुर्लभ कैवल्य-मुक्ति तक दे डालते हैं और जो दुष्टों को दण्ड देनेवाले हैं, वे कल्याणकारी श्रीशम्भु मेरे कल्याण का विस्तार करें।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंगलाचरण” प्रकरण का श्लोक ३ है। इस प्रकरण में लंकाकाण्ड के आरंभ में तुलसीदास द्वारा श्रीराम, शिव और गुरु की भक्तिमय वंदना का वर्णन है।
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मंगलाचरण