लव निमेष परमानु जुग बरष कलप

दोहा ० (क) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

लव निमेष परमानु जुग बरष कलप सर चंड। भजसि न मन तेहि राम को कालु जासु कोदंड॥ ० (क) ॥

अर्थ

लव, निमेष, परमाणु, युग, वर्ष और कल्प जिनके प्रचण्ड बाण हैं और काल जिनका धनुष है, हे मन! तू उन श्रीरामजी को क्यों नहीं भजता?

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना” प्रकरण का दोहा ० (क) है। इस प्रकरण में नल-नील द्वारा सेतु निर्माण और श्रीरामेश्वर की स्थापना का वर्णन है।

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सेतु निर्माण और रामेश्वर स्थापना