यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ
चौपाई ३, दोहा ६२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषाद पुनि पुनि सिर धुनेऊ॥ ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा॥ ३ ॥
अर्थ
यह समाचार जब दशानन ने सुना, तब वह अत्यन्त विषाद से बार-बार सिर धुनने लगा। वह व्याकुल होकर कुम्भकर्ण के पास गया और अनेक उपाय करके उसे जगाया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।
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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश