जागा निसिचर देखिअ कैसा
जागा निसिचर देखिअ कैसा
चौपाई ४, दोहा ६२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा॥ कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई॥ ४ ॥
अर्थ
कुम्भकर्ण जागा। वह कैसा दिखायी देता है, मानो काल ही शरीर धारण करके बैठा हो। कुम्भकर्ण ने पूछा--हे भाई! कहो तो, तुम्हारा मुख सूख क्यों रहे हैं ?।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।
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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश