उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती
उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती
चौपाई २, दोहा २० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
उत्तम कुल पुलस्ति कर नाती। सिव बिरंचि पूजेहु बहु भाँती॥ बर पायहु कीन्हेहु सब काजा। जीतेहु लोकपाल सब राजा॥ २ ॥
अर्थ
तुम्हारा उत्तम कुल है, पुलस्त्य ऋषि के तुम पौत्र हो। शिवजी की और ब्रह्माजी की तुमने बहुत प्रकार से पूजा की है। उनसे वर पाये हो और सब काम सिद्ध किये हैं। लोकपालों और सब राजाओं को तुमने जीत लिया है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद