नृप अभिमान मोह बस किंबा

चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

नृप अभिमान मोह बस किंबा। हरि आनिहु सीता जगदंबा॥ अब सुभ कहा सुनहु तुम्ह मोरा। सब अपराध छमिहि प्रभु तोरा॥ ३ ॥

अर्थ

राजमद से या मोहवश तुम जगज्जननी सीताजी को हर लाये हो। अब तुम मेरे शुभ वचन (मेरी हितभरी सलाह) सुनो! [उसके अनुसार चलने से] प्रभु श्रीरामजी तुम्हारे सब अपराध क्षमा कर देंगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद