उठी रेनु रबि गयउ छपाई
उठी रेनु रबि गयउ छपाई
चौपाई ४, दोहा ७९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
उठी रेनु रबि गयउ छपाई। मरुत थकित बसुधा अकुलाई॥ पनव निसान घोर रव बाजहिं। प्रलय समय के घन जनु गाजहिं॥ ४ ॥
अर्थ
इतनी धूल उड़ी कि सूर्य छिप गये। [फिर सहसा] पवन रुक गया और पृथ्वी अकुला उठी। ढोल और नगाड़े भीषण ध्वनि से बज रहे हैं; जैसे प्रलयकाल के बादल गरज रहे हों।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।
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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ