अति बिचित्र बाहिनी बिराजी

चौपाई ३, दोहा ७९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

अति बिचित्र बाहिनी बिराजी। बीर बसंत सेन जनु साजी॥ चलत कटक दिगसिंधुर डगहीं। छुभित पयोधि कुधर डगमगहीं॥ ३ ॥

अर्थ

अत्यन्त विचित्र फौज शोभित है। मानो वीर वसन्त ने सेना सजायी हो। सेना के चलने से दिशाओं के हाथी डिगने लगे, समुद्र क्षुब्ध हो गये और पर्वत डगमगाने लगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।

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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ