भेरि नफीरि बाज सहनाई
भेरि नफीरि बाज सहनाई
चौपाई ५, दोहा ७९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
भेरि नफीरि बाज सहनाई। मारू राग सुभट सुखदाई॥ केहरि नाद बीर सब करहीं। निज निज बल पौरुष उच्चरहीं॥ ५ ॥
अर्थ
भेरी, नफीरी (तुरही) और शहनाईमें योद्धाओंको सुख देनेवाला मारू राग बज रहा है। सब वीर सिंहनाद करते हैं और अपने-अपने बल-पौरुषका बखान कर रहे हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण के युद्ध-प्रस्थान, राम के विजय रथ के महात्म्य और वानर-राक्षस संग्राम का वर्णन है।
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रावण का प्रस्थान, राम का विजय रथ