उत रावन इत राम दोहाई
उत रावन इत राम दोहाई
चौपाई ४, दोहा ४१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
उत रावन इत राम दोहाई। जयति जयति जय परी लराई॥ निसिचर सिखर समूह ढहावहिं। कूदि धरहिं कपि फेरि चलावहिं॥ ४ ॥
अर्थ
उधर रावण और इधर श्रीराम की दोहाई है। जय-जय की ध्वनि होते ही लड़ाई छिड़ गयी। राक्षस पहाड़ों के ढेर-के-ढेर शिखरों को फेंकते हैं। वानर कूदकर उन्हें पकड़ लेते हैं और फिर उन्हीं की ओर चलाते हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ