तुरत बिमान तहाँ चलि आवा

चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तुरत बिमान तहाँ चलि आवा। दंडक बन जहँ परम सुहावा॥ कुंभजादि मुनिनायक नाना। गए रामु सब कें अस्थाना॥ १ ॥

अर्थ

विमान शीघ्र ही वहाँ चला आया जहाँ परम सुन्दर दण्डकवन था, और कुम्भजादि अनेक मुनिनायक रहते थे। श्रीरामजी इन सब के स्थानों में गये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।

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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान