सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा
सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा
चौपाई २, दोहा १२० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सकल रिषिन्ह सन पाइ असीसा। चित्रकूट आए जगदीसा॥ तहँ करि मुनिन्ह केर संतोषा। चला बिमानु तहाँ ते चोखा॥ २ ॥
अर्थ
सम्पूर्ण ऋषियों से आशीर्वाद पाकर जगदीश्वर श्रीरामजी चित्रकूट आये। वहाँ मुनियों को सन्तुष्ट किया। [फिर] विमान वहाँ से आगे तेजी के साथ चला।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १२० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।
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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान