तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ
तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ
चौपाई २, दोहा २३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तुम्ह सुग्रीव कूलद्रुम दोऊ। अनुज हमार भीरु अति सोऊ॥ जामवंत मंत्री अति बूढ़ा। सो कि होइ अब समरारूढ़ा॥ २ ॥
अर्थ
तुम और सुग्रीव, दोनों [नदी] तट के वृक्ष हो। [रहा] मेरा छोटा भाई विभीषण, [सो] वह भी बड़ा डरपोक है। मन्त्री जाम्बवान् बहुत बूढ़ा है। वह अब लड़ाई में क्या चढ़ (उद्यत हो) सकता है ?
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद