सिल्पिकर्म जानहिं नल नीला

चौपाई ३, दोहा २३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सिल्पिकर्म जानहिं नल नीला। है कपि एक महा बलसीला॥ आवा प्रथम नगरु जेहिं जारा। सुनत बचन कह बालिकुमारा॥ ३ ॥

अर्थ

नल-नील तो शिल्प-कर्म जानते हैं (वे लड़ना क्या जानें ?)। हाँ, एक वानर जरूर महान् बलवान् है, जो पहले आया था, और जिसने नगर जला दिया था। यह वचन सुनते ही बालिपुत्र अंगद ने कहा--।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।

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अंगद का लंका में रावण से संवाद