तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद
तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद
चौपाई १, दोहा २३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तुम्हरे कटक माझ सुनु अंगद। मो सन भिरिहि कवन जोधा बद॥ तव प्रभु नारि बिरहँ बलहीना। अनुज तासु दुख दुखी मलीना॥ १ ॥
अर्थ
अरे अंगद! सुन; तेरी सेना में बता, ऐसा कौन योद्धा है जो मुझसे भिड़ सकेगा। तेरा मालिक तो स्त्री के वियोग में बलहीन हो रहा है। और उसका छोटा भाई उसी के दुःख से दुःखी और उदास है।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “अंगद का लंका में रावण से संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अंगद का लंका की सभा में रावण को सीता लौटाने और राम की शरण लेने का अंतिम अवसर देने का वर्णन है।
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अंगद का लंका में रावण से संवाद