तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन
तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन
चौपाई १, दोहा ७८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तिन्हहि ग्यान उपदेसा रावन। आपुन मंद कथा सुभ पावन॥ पर उपदेस कुसल बहुतेरे। जे आचरहिं ते नर न घनेरे॥ १ ॥
अर्थ
रावण ने उनको ज्ञान का उपदेश किया। वह स्वयं तो नीच है, पर उसकी कथा शुभ और पवित्र है। दूसरों को उपदेश देने में तो बहुत लोग निपुण होते हैं। पर ऐसे लोग अधिक नहीं हैं जो उपदेश के अनुसार आचरण भी करते हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।
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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार