निसा सिरानि भयउ भिनुसारा

चौपाई २, दोहा ७८ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

निसा सिरानि भयउ भिनुसारा। लगे भालु कपि चारिहुँ द्वारा॥ सुभट बोलाइ दसानन बोला। रन सन्मुख जा कर मन डोला॥ २ ॥

अर्थ

रात बीत गई, भिनसारा हुआ। रीछ-वानर चारों दरवाजों पर जा डटे। योद्धाओं को बुलाकर दशमुख रावण ने कहा—लड़ाई में शत्रु के सम्मुख जाकर जिसका मन डाँवाडोल हो।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ७८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मेघनाद के यज्ञ के विध्वंस, भीषण युद्ध और प्रभु-कृपा से उसके उद्धार का वर्णन है।

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मेघनाद के यज्ञ का विध्वंस और उद्धार