तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा

चौपाई २, दोहा ८९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तेज पुंज रथ दिब्य अनूपा। हरषि चढ़े कोसलपुर भूपा॥ चंचल तुरग मनोहर चारी। अजर अमर मन सम गतिकारी॥ २ ॥

अर्थ

उस दिव्य अनुपम और तेज पुंज रथ पर कोसलपुर के राजा श्रीरामचन्द्रजी हर्षित होकर चढ़े। उसमें चार चंचल, मनोहर, अजर, अमर और मन की गति के समान शीघ्र चलनेवाले (देवलोक के) घोड़े जुते थे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।

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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध