रथारूढ़ रघुनाथहि देखी

चौपाई ३, दोहा ८९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

रथारूढ़ रघुनाथहि देखी। धाए कपि बलु पाइ बिसेषी॥ सही न जाइ कपिन्ह कै मारी। तब रावन माया बिस्तारी॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी को रथ पर चढ़े देखकर वानर विशेष बल पाकर दौड़े। वानरों की मार सही नहीं जाती। तब रावण ने माया फैलायी।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में इंद्र के दिव्य रथ पर आरूढ़ होकर श्रीराम और रावण का घोर युद्ध का वर्णन है।

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इंद्र का दिव्य रथ, राम-रावण युद्ध