तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा
तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा
चौपाई ५, दोहा १०० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहिं पद गहि बहु बिधि समुझावा। भोरु भएँ रथ चढ़ि पुनि धावा॥ सुनि आगवनु दसानन केरा। कपि दल खरभर भयउ घनेरा॥ ५ ॥
अर्थ
सारथि ने चरण पकड़कर रावण को बहुत प्रकार से समझाया। सबेरा होते ही वह रथ पर चढ़कर फिर दौड़ा। रावण का आना सुनकर वानरों की सेना में बड़ी खलबली मच गयी।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
त्रिजटा-सीता संवाद