इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा
इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा
चौपाई ४, दोहा १०० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा॥ सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही॥ ४ ॥
अर्थ
यहाँ आधी रात को रावण जागा और अपने सारथि पर रुष्ट होकर कहने लगा-- ओरे मूर्ख! तूने मुझे रणभूमि से अलग कर दिया। अरे अधम! अरे मन्दबुद्धि! तुझे धिक्कार है, धिक्कार है!
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
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त्रिजटा-सीता संवाद