जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी
जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी
चौपाई ६, दोहा १०० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
जहँ तहँ भूधर बिटप उपारी। धाए कटकटाइ भट भारी॥ ६ ॥
अर्थ
वे भारी योद्धा जहाँ-तहाँ से पर्वत और वृक्ष उखाड़कर [क्रोध से] दाँत कटकटाकर दौड़े।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १०० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
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त्रिजटा-सीता संवाद