तेही निसि सीता पहिं जाई
तेही निसि सीता पहिं जाई
चौपाई १, दोहा ९९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई॥ सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी॥ १ ॥
अर्थ
उसी रात त्रिजटा ने सीताजी के पास जाकर उन्हें सब कथा कह सुनायी। शत्रु के सिर और भुजाओं की बढ़ती का संवाद सुनकर सीताजी के हृदय में बड़ा भय हुआ।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
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त्रिजटा-सीता संवाद