मुख मलीन उपजी मन चिंता
मुख मलीन उपजी मन चिंता
चौपाई २, दोहा ९९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
मुख मलीन उपजी मन चिंता। त्रिजटा सन बोली तब सीता॥ होइहि कहा कहसि किन माता। केहि बिधि मरिहि बिस्व दुखदाता॥ २ ॥
अर्थ
मुँह म्लान हो गया, मन में चिन्ता उत्पन्न हो गयी। तब सीताजी त्रिजटा से बोलीं— हे माता! बताती क्यों नहीं? क्या होगा? सम्पूर्ण विश्व को दुःख देनेवाला यह किस प्रकार मरेगा ?
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
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त्रिजटा-सीता संवाद