तात लात रावन मोहि मारा

चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तात लात रावन मोहि मारा। कहत परम हित मंत्र बिचारा॥ तेहिं गलानि रघुपति पहिं आयउँ। देखि दीन प्रभु के मन भायउँ॥ ३ ॥

अर्थ

[विभीषण ने कहा--] हे तात! परम हितकर सलाह और विचार कहने पर रावण ने मुझे लात मारी। उसी ग्लानि के मारे मैं श्रीरघुनाथजी के पास चला आया। दीन देखकर प्रभु के मन को मैं [बहुत] प्रिय लगा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।

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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश