देखि बिभीषनु आगें आयउ

चौपाई २, दोहा ६४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

देखि बिभीषनु आगें आयउ। परेउ चरन निज नाम सुनायउ॥ अनुज उठाइ हृदयँ तेहि लायो। रघुपति भक्त जानि मन भायो॥ २ ॥

अर्थ

उसे देखकर विभीषण आगे आये और उसके चरणों पर गिरकर अपना नाम सुनाया। छोटे भाई को उठाकर उसने हृदय से लगा लिया और श्रीरघुनाथजी का भक्त जानकर वे उसके मन को प्रिय लगे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।

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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश