सुनु सुत भयउ कालबस रावन
सुनु सुत भयउ कालबस रावन
चौपाई ४, दोहा ६४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनु सुत भयउ कालबस रावन। सो कि मान अब परम सिखावन॥ धन्य धन्य तैं धन्य बिभीषन। भयहु तात निसिचर कुल भूषन॥ ४ ॥
अर्थ
[कुम्भकर्ण ने कहा--] हे पुत्र! सुन, रावण तो काल के वश हो गया है (उसके सिर पर मृत्यु नाच रही है)। वह क्या अब परम शिक्षा मान सकता है? हे विभीषण! तू धन्य है, धन्य है, धन्य है। हे तात! तू राक्षसकुल का भूषण हो गया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “कुंभकर्ण का जागना और उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण द्वारा कुंभकर्ण को जगाने, उसके कठोर उपदेश और विभीषण से सार्थक संवाद का वर्णन है।
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कुंभकर्ण का जागना और उपदेश