तात गहरु होइहि तोहि जाता

चौपाई ३, दोहा ६० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तात गहरु होइहि तोहि जाता। काजु नसाइहि होत प्रभाता॥ चढ़ु मम सायक सैल समेता। पठवौं तोहि जहँ कृपानिकेता॥ ३ ॥

अर्थ

हे तात! तुम्हारे जाने में देर होगी और भोर होते ही काम बिगड़ जाएगा। [अतः] तुम पर्वत सहित मेरे बाण पर चढ़ जाओ, मैं तुम्हें वहाँ भेज दूँ जहाँ कृपानिकेत श्रीरामजी हैं।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में औषधि लेकर लौटते हनुमान पर भरत के बाण का प्रहार और उनके बीच भावपूर्ण मिलन-संवाद का वर्णन है।

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भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद