अहह दैव मैं कत जग जायउँ
अहह दैव मैं कत जग जायउँ
चौपाई २, दोहा ६० के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
अहह दैव मैं कत जग जायउँ। प्रभु के एकहु काज न आयउँ॥ जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि सन बोले बलबीरा॥ २ ॥
अर्थ
हा दैव! मैं जगत में क्यों जन्मा? प्रभु के एक भी काम न आया। जानि कुअवसरु मन धरि धीरा। पुनि कपि से बोले बलबीरा॥
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में औषधि लेकर लौटते हनुमान पर भरत के बाण का प्रहार और उनके बीच भावपूर्ण मिलन-संवाद का वर्णन है।
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भरत का बाण, हनुमान-भरत संवाद