तात बचन मम सुनु अति आदर
तात बचन मम सुनु अति आदर
चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तात बचन मम सुनु अति आदर। जनि मन गुनहु मोहि करि कादर॥ प्रिय बानी जे सुनहिं जे कहहीं। ऐसे नर निकाय जग अहहीं॥ ४ ॥
अर्थ
हे तात! मेरे वचनों को बहुत आदर से (बड़े गौर से) सुनिये। मुझे मन में कायर न समझ लीजियेगा। जगत् में ऐसे मनुष्य झुंड-के-झुंड (बहुत अधिक) हैं, जो प्यारी (मुँह पर मीठी लगने वाली) बात ही सुनते और कहते हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश