बचन परम हित सुनत कठोरे
बचन परम हित सुनत कठोरे
चौपाई ५, दोहा ९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बचन परम हित सुनत कठोरे। सुनहिं जे कहहिं ते नर प्रभु थोरे॥ प्रथम बसीठ पठउ सुनु नीती। सीता देइ करहु पुनि प्रीती॥ ५ ॥
अर्थ
हे प्रभो! सुनने में कठोर परन्तु [परिणाम में] परम हितकारी वचन जो सुनते और कहते हैं, वे मनुष्य बहुत ही थोड़े हैं। नीति सुनिये, [उसके अनुसार] पहले दूत भेजिये, और [फिर] सीता को देकर श्रीरामजी से प्रीति [मेल] कर लीजिये।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का रावण को उपदेश” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को सीता-वापसी का उपदेश और रावण-प्रहस्त संवाद का वर्णन है।
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मंदोदरी का रावण को उपदेश