तासु तेज समान प्रभु आनन

चौपाई ५, दोहा १०३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

तासु तेज समान प्रभु आनन। हरषे देखि संभु चतुरानन॥ जय जय धुनि पूरी ब्रह्मंडा। जय रघुबीर प्रबल भुजदंडा॥ ५ ॥

अर्थ

रावण का तेज प्रभु के मुख में समा गया। यह देखकर शिवजी और ब्रह्माजी हर्षित हुए। ब्रह्माण्ड भर में जय-जय की ध्वनि भर गयी। प्रबल भुजदण्डों वाले श्रीरघुवीर की जय हो।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध