बरषहिं सुमन देव मुनि बृंदा
बरषहिं सुमन देव मुनि बृंदा
चौपाई ६, दोहा १०३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बरषहिं सुमन देव मुनि बृंदा। जय कृपाल जय जयति मुकुंदा॥ ६ ॥
अर्थ
देवता और मुनियों के समूह फूल बरसाते हैं और कहते हैं--कृपालु की जय हो, मुकुन्द की जय हो, जय हो!।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
राम-रावण युद्ध, रावण वध