मंदोदरि आगें भुज सीसा

चौपाई ४, दोहा १०३ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

मंदोदरि आगें भुज सीसा। धरि सर चले जहाँ जगदीसा॥ प्रबिसे सब निषंग महुँ जाई। देखि सुरन्ह दुंदुभीं बजाई॥ ४ ॥

अर्थ

रावण की भुजाओं और सिरों को मन्दोदरी के सामने रखकर राम-बाण वहाँ चले, जहाँ जगदीश्वर श्रीरामजी थे। सब बाण जाकर तरकस में प्रवेश कर गये। यह देखकर देवताओं ने नगाड़े बजाये।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम-रावण युद्ध, रावण वध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम-रावण के निर्णायक युद्ध और रावण वध के बाद देवताओं की जयध्वनि का वर्णन है।

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राम-रावण युद्ध, रावण वध